बदनाम करने के लिये किया जा रहा हैं दुष्प्रचार

Category : बिजनेस, खेल, | Sub Category : सभी Posted on 2021-01-07 09:23:10


बदनाम करने के लिये किया जा रहा  हैं दुष्प्रचार

- अडानी गु्रप ने दुष्प्रयान से जुड़े सवालों के जवाब में दिया स्पष्टीकरण
अडाणी समूह को लेकर कई प्रकार के सवाल आजकल पूछे जा रहे हैं और बिना सच्चाई जाने उनके जवाब की आड़ में दुष्प्रचार किया जा रहा है.
अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स के वाइस प्रेसिडेंट - पुनीत  मेंहदीरत्ता ने फार्म बिल्स को लेकर उठाये जा रहे कुछ सवालों के जवाब इस प्रकार से दिये.
1 सवाल - अदाणी के खिलाफ यह आरोप है कि आपको इस बात की पहले से ही जानकारी थी कि सरकार कृषि बिल लाने वाली है. इसलिए आपने पंजाब के मोगा जिले में पहले से ही ‘सायलो’ का निर्माण कर लिया था, जिसमें अनाज का अत्याधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से भंडारण किया जाता है.
उत्तर - हमने पिछले दिनों में बार-बार जनता के सामने सच्चाई रखी हैं कि अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स किसानों से कोई अनाज नहीं खरीदती है.
भारत जैसे विकासशील देशों में स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है. जहाँ एक तरफ हमारे देश में गरीबी और भुखमरी की समस्या है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक भंडारण सुविधाएँ न होने के कारण बहुत सारा अनाज खराब हो जाता है और खाने योग्य नहीं रहता.
अनाज को खराब होने से बचाने के लिए एवं अनाज की पूरी पोषण मात्रा  पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (पीडीएस) के तहत वितरित किए जाने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार ने फूड कारपोरेशन आॅफ इंडिया (एफसीआई) के माध्यम से वर्ष 2005 में देश के विभिन्न राज्यों में ग्रेन साइलो, रेलवे साइडिंगस, और बल्क ट्रेन के निर्माण  हेतु ग्लोबल ट्रेडर्स के लिये निजी कंपनियों से आवेदन मंगाये थे जिसमें अदाणी के अलावा देश और दुनिया की विभिन्न बड़ी बड़ी कंपनियों ने हिस्सा लिया था. क्योंकि अदाणी ने सबसे कम दाम क्वोट किए, इसलिए उसे प्रोजेक्ट लगाने का अवसर मिला जिससे वर्ष 2005 में अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स का जन्म हुआ. कंपनी 2007 से कार्यरत है और एफसीआई को सेवाएँ प्रदान कर रही है. इसलिए यह कहना बिलकुल गलत है कि अदाणी ने सायलोस का निर्माण फार्म बिल्स आने के बाद किया है.
2 सवाल - तो क्या यह मान लिया जाए कि अदाणी ग्रुप भविष्य में कांट्रैक्ट फार्मिंग करने का इरादा रखती है और इसके लिए जमीन का अधिग्रहण भी कर रही है? कुछ पार्टियाँ तो यह कैम्पेन चला रही हैं कि कृषि बिल अदाणी और अंबानी के लिए ही लाए गए हैं। क्या इन आरोपों में सच्चाई है ?
उत्तर - इसमें कतई भी सच्चाई नहीं है. मैं आपको यह आश्वासन दिलाना चाहता हूँ कि कंपनी कोई कांट्रैक्ट फार्मिंग का काम भी नहीं करती है और न ही भविष्य में कंपनी का ऐसा कोई इरादा है. यह भी गलत आरोप लगाया जा रहा है कि अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स कांट्रैक्ट फार्मिंग के लिए पंजाब और हरियाणा में जमीन का अधिग्रहण कर रही है. कंपनी का पंजाब, हरियाणा अथवा किसी अन्य राज्य में कांट्रैक्ट फार्मिंग करने का कोई इरादा नहीं है. अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स मात्र अनाज के भंडारण एवं परिवहन का काम करती है, किसानों से अनाज खरीदने का काम एफसीआई करती है. भारत में कम से कम एक दर्जन ऐसी कंपनियाँ हैं जो अनाज के भंडारण या परिवहन का काम करती हैं. अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स उन एक दर्जन कंपनियों में से एक है.
दूसरी बात, हमारा काम सिर्फ और सिर्फ आधुनिक और विश्वस्तरीय भंडारण एवं परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना और उसे चलाना है. इस काम के लिए हमें तयशुदा फीस मिलती है. और उस फीस को कम्पीटिटिव टेंडरिंग के तहत फिक्स किया गया है. तीसरी बात, अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स जैसी कम से कम एक दर्जन और कंपनियाँ इस देश में हैं. चैथी बात, अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स के द्वारा बनाया गया इंफ्रास्ट्रक्चर देश की धरोहर है जिसका मुख्य उद्देश्य मेहनतकश किसानों के द्वारा उगाए हुए अनाज को सुरक्षित तरीके से सरकार की पीडीएस व्यवस्था के अंतर्गत लोगों तक पहुँचाना है.
एक मुहावरा है, अगर किसी का काम खराब न कर सको तो उसका नाम खराब कर दो. अगर हमारे काम में कोई कमी है तो जरूर हमें सूली पर चढ़ा दें, लेकिन सिर्फ नाम खराब करने के लिए झूठे आरोप लगाना सही नहीं है.
3 सवाल - आपकी आवाज में थोड़ा दर्द दिख रहा है. अगर आपकी बात मानें तो आपने मोगा में सायलो का निर्माण 2007 में किया था, तो फिर अदाणी के नाम के पुतले क्यों जलाए जा रहे हैं? आपके मोगा के सायलो के बाहर पिछले कई हफ्तों से धरना प्रदर्शन क्यों चल रहा है?
उत्तर - मैं सन् 2007 से अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स के साथ हूँ. जिस तरह से अदाणी का नाम खराब करने की कोशिश की जा रही है उससे मन में बहुत पीड़ा है। जैसा कि मैंने पहले बताया है कि अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स देश का पहला इंटेग्रेटेड स्टोरेज एंड ट्रांसपोर्टेशन प्रोजेक्ट है जिसके लिए टेंडरिंग की प्रक्रिया सरकार ने 2005 में पूर्ण की थी, जिसके तहत कंपनी ने विभिन्न राज्यों में सात जगहों पर ग्रेन साइलो और साइडिंग का निर्माण किया था.
प्रोजेक्ट का दूसरा बड़ा हिस्सा था रेलवे साइडिंग का निर्माण - न सिर्फ मोगा और कैथल में बल्कि चेन्नई, कोयंबटूर, बंगलोर, नवी मुंबई और हूगली में भी. इन पाँच जगहों पर अनाज का ट्रांसपोर्टेशन करने की जिम्मेदारी भी हमारी थी. और इसके लिए हमने बल्क ट्रेन भी अधिग्रहित की. हमने प्रोजेक्ट लगाने के लिए विश्वस्तरीय अत्याधुनिक टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल किया. अमरीकन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने एक बार कहा था - “अमेरिकन रोड्स आर गुड नाॅट बिकाज अमेरिका इज रिच, अमेरिका इज रिच बिकाज अमेरिकन रोड्स आर गुड.”.
 देश के विकास के लिए अच्छे इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है और अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स फूडग्रैन स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण पिछले 15 वर्षों से कर रही है और आगे भी करती रहेगी.
जहां तक धरना प्रदर्शन की बात है मोगा सायलो में एफसीआई किसानों से 2008 से अनाज खरीद रही है और जो भी किसान इस व्यवस्था से जुड़े है वे इससे बहुत खुश है और हर साल अपना अनाज एफसीआई को बेचने के लिए मोगा सायलो में ही आते है. जितने भी प्रदर्शनकारी मोगा सायलो के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे है उसमें से ज्यादातर बाहर के लोग है और स्थानीय इलाके से नहीं है.
2007 में जब हमने देश के पहले इंटेग्रटेड सायलो प्रोजेक्ट का निर्माण किया तो इसकी अपार सफलता को देखते हुए एफसीआई ने अन्य राज्यों में ऐसे बहुत सारे प्रोजेक्ट लॉन्च किए. कुछ प्रोजेक्ट्स हमने बिड्स में जीते, बाकी प्रोजेक्ट्स दूसरी कंपनियों के पास हैं.
4. सवाल - तो आपका कहना है कि यह खबर झूठी है कि अदाणी हरियाणा में रेल्वे ट्रैक्स का निर्माण इसलिए कर रहा है क्योंकि वो बड़ी मात्रा में किसानों से अनाज खरीदेगा?
उत्तर -. इसका आंकलन आप करिए कि कौन सी न्यूज फेक है और कौन सी सही. मैं आपके सामने तथ्य रख रहा हूँ. सायलोस का निर्माण कहाँ होगा यह सरकारी एजेंसी तय करती है. एफसीआई ने टेण्डर्स फ्लोट किए जिसमें उन्होंने 26 लोकेशन्स सायलो के निर्माण के लिए चुनी. अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स ने उस टेण्डर में हिस्सा लिया. हमें सिर्फ दो लोकेशन्स मिली. बाकी 24 लोकेशन्स दूसरी कंपनियों के पास है. जो रेल्वे साइडिंग्स बनाने की बात है वो टेण्डर का यानि कि प्रोजेक्ट का हिस्सा है. रेल्वे साइडिंग्स सायलो को करीबी रेलवे लाइन से जोड़ने का काम करती है जिससे अनाज का उत्पादक राज्यों से पूरे देश में वितरण किया जा सके.
5. सवाल - क्या आपने सायलोस के निर्माण के लिए जमीन का अधिग्रहण किया है?
उत्तर - जैसा कि मैंने पहले बताया सायलोस कहाँ बनेंगे ये एफसीआई यानि बिडिंग एजेंसी तय करती है. जमीन कहाँ होगी और सायलोस बनाने के नियम क्या होंगे ये सब भी सिर्फ एफसीआई ही तय करती है.
हमारे जैसी कंपनियों का काम सिर्फ प्रोजेक्ट को लागू करना और चलाना है जिसकी एवज में हमें एक निर्धारित फीस मिलती है. दूसरी बात, सायलोस बनाने के लिए कम जमीन की आवश्यकता रहती है क्योंकि सायलोस में अनाज को वर्टिकली स्टोर किया जाता है. जबकि ट्रेडिशनल गोडाउन्स में अनाज हारोजेंटियली स्टोर किया जाता है. सायलोस में जमीन का इस्तेमाल कम होता है, इसके अलावा इसमें यांत्रिकी एवं स्वचालित परिचालन (मेकेनाइज्ड एंड आॅटोमेटेड आपरेशन्स) के कारण परंपरागत गोडाउन्स की तुलना में शुरू से अंत तक फूडग्रेन सप्लाई चैन (एण्ड टू एण्ड फूड ग्रेन सप्लाई चैन) का खर्च काफी कम होता है और यह ज्यादा किफायती है. जिसका सीधा फायदा सरकार को ही होता है.  
6. सवाल -  2017-18 में अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स ने एक रिपोर्ट में लिखा था कि उन्हें आनेवाले समय में कुछ नए और बड़े कांट्रैक्ट्स मिलेंगे और इन कांट्रैक्ट्स के कारण कंपनी के व्यापार में काफी वृद्धि होगी. तो क्या आपको पहले से पता था कि फार्म बिल्स आनेवाले है?
 उत्तर - अनाज भंडारण और परिवहन का फार्म बिल्स से कोई लेना देना नहीं है। देश में अनाज उत्पादन के साथ साथ उसके भंडारण और परिवहन की आवश्यकता भी बढ़ती रहती है. क्योंकि अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस में है तो किसी भी कंपनी की तरह हम भी भविष्य के लिए प्लानिंग करते हैं. हर कंपनी आगे बढ़ना चाहती है. दुनिया की कोई भी कंपनी उठा के देख लीजिए वो फ्युचर प्रोजेक्ट्स के लिए प्लानिंग करती ही है.
7. सवाल - क्या ये सच है कि सरकार ने यह वादा किया है कि वे एएएलएल के भंडारण का लगातार 30 सालों तक उपयोग करेगी और गेरंटेड रेवन्यू देगी? और एएएलएल को दी जानेवाली आमदनी में हर साल बढ़ोत्तरी होगी?
उत्तर -. सायलोस का निर्माण एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में किया जाता है जिसमें बड़ी मात्रा में पूंजी निवेश होता है. कोई भी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का निर्माण लंबी अवधि के लिए किया जाता है. निजी कंपनियाँ उसमें तभी हिस्सा लेना चाहेगी जब इस प्रकार के प्रोजेक्ट्स को लंबे समय के लिए सिक्यूर किया जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए पहले प्रोजेक्ट कि अवधि एफसीआई के द्वारा 20 वर्ष तय की गई थी, लेकिन और कंपनियों को आकर्षित करने के लिए एवं प्रतिस्पर्धात्मक बिडिंग के लिए सरकार के द्वारा इसे 30 वर्ष किया गया. इसे केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में एक स्टैंडर्ड प्रेक्टिस माना जाता है.
जहां तक हर साल बढ़ोत्तरी का सवाल है. आप कोई भी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के टेण्डर डॉकयुमेंट उठा के देख लीजिये उसमें आपको इस तरह का क्लॉज मिल जाएगा, जो की प्राइज इंडेक्स से लिंक होता है, जिसका उद्देश्य महंगाई की वजह से बढ़ते हुए खर्च को समाहित करना है. यह इस्केलेशन क्लाज टैडर डाक्यूमेंट में  पहले से सरकार के द्वारा ही शामिल किया जाता है.  
क्योंकि ये इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है जिसका निर्माण एफसीआई अथवा बिडिंग एजेंसी के लिए किया जाता है, इसलिए सरकार की तरफ से कंपनी के बिड रेट्स के मुताबिक गेरंटेड रेवन्यू का प्रावधान किया जाता है और यह प्रावधान न केवल अदाणी के लिए है बल्कि उन सारी कंपनियों के लिए है जो इस क्षेत्र में कार्यरत है.
 8. सवाल - आपके खिलाफ ये आरोप है कि फार्म बिल्स पास होने के कुछ महीने पहले आपने 53 कंपनियों का गठन किया?
 उत्तर -. ये आंकड़े गलत है. जब भी कोई सरकारी एजेंसी सायलो बनाने के लिए नया टेण्डर फ्लोट करती है तो टेण्डर की शर्त के मुताबिक एक नई स्पेशल पर्पस व्हिकल (एसपीव्ही) का गठन करना अनिवार्य होता है. ऐसा आपको दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी देखने को मिलेगा, इसका उद्देश्य ये होता है कि हर टेण्डरिंग एजेंसी अपने प्रोजेक्ट को सुरक्षित रखना चाहती है. वो ये नहीं चाहती कि किसी दूसरी गु्रप कंपनी का प्रभाव उसके प्रोजेक्ट पर पड़े. कॉर्पोरेट लॉं के अनुसार हर कंपनी अपने आप में स्वतंत्र होती है. नई कंपनी बनाना कानून और बिजनेस की आवश्यकता है।.
9. सवाल - कहा जाता है कि भारत सरकार ने आपको सायलोस बनाने के लिए 700 करोड़ दिये है, इस बात में कितनी सच्चाई है?
उत्तर -  भारत सरकार ने हमें कतई भी 700 करोड़ तो क्या 7 करोड़ भी नहीं दिए है. जिस 700 करोड़ की बात की जा रही है वह अदाणी ग्रुप ने 2007 में सात जगहों पर इंटेग्रटेड पाइलट प्रोजेक्ट का निर्माण करने में निवेश किया है जिसके तहत कंपनी ने सायलोस, रेलवे साइडिंग्स, बल्क ट्रेन्स स्थापित किए और यह प्रोजेक्ट अपने आप में देश का ऐसा पहला प्रोजेक्ट है.

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