एपीएसईजेड ने सीडीपी 2020 में मैनेजमेंट बैंड हासिल किया

Category : बिजनेस, खेल, | Sub Category : सभी Posted on 2020-12-22 02:07:57


एपीएसईजेड ने सीडीपी 2020 में मैनेजमेंट बैंड हासिल किया

- एपीएसईजेड जलवायु परिवर्तन में सीडीपी स्कोर बी के साथ वैश्विक और एशिया क्षेत्रीय औसत ऊपर पहुंचा.
                                                                                                अहमदाबाद. अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एपीएसईजेड) लिमिटेड ने बी स्कोर हासिल किया, जो जलवायु परिवर्तन पर सीडीपी स्कोर फ्रेमवर्क के अनुसार मैनेजमेंट बैंड में है. यह इंटरमोडल ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स सेक्टर के औसत डी, एशिया क्षेत्र के औसत डी और वैश्विक औसत सी से अधिक है. यह उपलब्धि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने की दिशा में प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए, प्रतिस्पर्धी बेंचमार्क स्थापित करने में एपीएसईजेड की नेतृत्वकारी भूमिका को दर्शाता है. पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में, 22 प्रतिशत कंपनियां डिस्क्लोजर बैंड में, 17 प्रतिशत अवेयरनेस बैंड में, 41 प्रतिशत मैनेजमेंट बैंड में और 20 प्रतिशत लीडरशिप बैंड में हैं. एपीएसईजेड का परफॉरमेंस वैल्यू चेन एंगेजमेंट, टारगेट्स, स्कोप 1 एवं 2 उत्सर्जन, जोखिम प्रबंधन प्रक्रिया, अवसर प्रकटीकरण, शासन और ऊर्जा के क्षेत्रों में वैश्विक औसत के मुकाबले अच्छा रहा.
यह भी उल्लेखनीय है कि एपीएसईजेड ने सीडीपी - जल सुरक्षा में बी स्कोर प्राप्त किया है. यह इंटरमोडल ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक सेक्टर के औसत बी, एशिया क्षेत्रीय औसत बी और वैश्विक औसत बी के समान है. एपीएसईजेड ने जल जोखिम मूल्यांकन, जल नीतियों, टारगेट्स और गोल्स, पर्यावरणीय चुनौतियों, व्यापारिक रणनीति और व्यापारिक प्रभावों के लिए एकीकृत दृष्टिकोण के क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया.
यह दर्शाता है कि एपीएसईजेड जोखिम को कम करने, जोखिम वाले स्थानों पर एनवायरनमेंटल अकाउंटिंग को आगे बढ़ाने, जोखिम आकलन को अधिक मजबूत और व्यापक बनाने, पर्यावरण नीति लागू करने और पर्यावरण की समस्याओं को व्यापारिक रणनीति में एकीकृत करने काप्रयास कर रही है. इस तरह जलवायु परिवर्तन के लिए मैनेजमेंट स्कोरिंग, एक मैनेजमेंट एक्शन के रूप में इसे प्रोत्साहित करता है.
सीडीपी अपने पर्यावरणीय प्रभावों का प्रबंधन करने के लिए निवेशकों, कंपनियों, शहरों, राज्यों और क्षेत्रों के लिए वैश्विक प्रकटीकरण प्रणाली का उपयोग करता है. सीडीपी स्कोर जलवायु परिवर्तन, वन और जल सुरक्षा के मानदंडों पर संगठनों के ईएसजी क्रेडेंशियल्स को पूरा करते हैं. 2020 में, 9,600से अधिक कंपनियों ने सीडीपी के जरिये खुलासा किया कि 2015 में पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद से 70 प्रतिशत की वृद्धि और पिछले साल 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई.
एपीएसईजेड अक्षय ऊर्जा का उपयोग कर रहा है और यह वित्त वर्ष 2025 तक सभी पोर्ट कार्गो हैंडलिंग का 100 प्रतिशत संचालन अक्षय ऊर्जा से करने की स्थिति में है. इसके अलावा, एपीएसईजेड ने पहले ही 2,889 हेक्टेयर क्षेत्र में मैंग्रोव अफोरेस्टेशन किया है, और वित्त वर्ष 2025 तक अतिरिक्त 1,000 हेक्टेयर को इसमें शामिल करने का लक्ष्य रखा है.
अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड के बारे में
विश्व स्तर पर सक्रिय डायवर्सिफायड अदाणी ग्रुप का एक हिस्सा, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एपीएसईजेड), एक पोर्ट कंपनी से विकसित होकर भारत के पोर्ट्स एंड लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म बन चुका है. तटीय क्षेत्रों और दूरदराज के विशाल इलाकों से कारगो के विशाल वॉल्यूम की हैंडलिंग करते हुए, रणनीतिक रूप से मौजूद एपीएसईजेड के 11 पोर्ट और टर्मिनल, देश की कुल पोर्ट क्षमता के 24 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करते हैं. ये पोर्ट और टर्मिनल गुजरात में मुंद्रा, दाहेज, कांडला और हजीरा, ओडिशा में धामरा, गोवा में मारमुगाओ, आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम, चेन्नई में कट्टुपल्ली और एन्नोर तथा आंध्र प्रदेश में कृष्णापत्तनम में स्थित हैं. कंपनी केरल के विजिंजम में एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और म्यांमार में एक कंटेनर टर्मिनल भी विकसित कर रही है. हमारे पोर्ट्स टू लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म में हमारी पोर्ट सुविधाएं, एकीकृत लॉजिस्टिक्स क्षमताएं, और औद्योगिक आर्थिक क्षेत्र शामिल हैं, जो वैश्विक सप्लाई चेन में होने वाले संपूर्ण बदलाव से लाभ उठाने की भारत की तैयारी को देखते हुए, हमें विशेष लाभदायक स्थिति में रखते हैं. हमारी नजर अगले दशक में दुनिया का सबसे बड़ा पोर्ट और लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म बनने पर है. 2025 तक कार्बन न्यूट्रल होने की दृष्टि से, एपीएसईजेड विज्ञान आधारित लक्ष्य पहल (एसबीटीआई) के लिए हस्ताक्षर करने वाला पहला भारतीय पोर्ट और विश्व का तीसरा देश रहा, जो पूर्व-औद्योगिक स्तरों पर 1.5 डिग्री सेल्सियस तक ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने के लिए उत्सर्जन में कमी लाने के लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध रहा.

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